Sunday, May 11, 2014

माँ

माँ , मैं बन के तेरी परछाई जीत लूंगी इस जहां को ,
तेरे सपनें पूरे कर ज़मीं पे खींच लाऊंगी आसमां को ...

माँ, तू मेरे रग़ों में खूं बन  के बहती है ,
तेरे दूध से धोया है तूने मेरे हर गुनाह को ....

माँ  , तूने बताया था कि तुझे मैं नहीं, बेटा चाहिए था..
पर जब भी मेरी जान पे बन आयी, कैसे हराया तूने उस ' ख़ुदा ' को ?

माँ , सब कहते हैं तूने लाखों दर्द सहें हैँ..
पागल ये दुनिया कहाँ है समझनें के क़ाबिल मेरी ' माँ ' को। ।  

~ अमृता तालुकदार  ' सुबह ' …… 


HAPPY MOTHER's DAY! <3