माँ , मैं बन के तेरी परछाई जीत लूंगी इस जहां को ,
तेरे सपनें पूरे कर ज़मीं पे खींच लाऊंगी आसमां को ...
तेरे सपनें पूरे कर ज़मीं पे खींच लाऊंगी आसमां को ...
माँ, तू मेरे रग़ों में खूं बन के बहती है ,
तेरे दूध से धोया है तूने मेरे हर गुनाह को ....
तेरे दूध से धोया है तूने मेरे हर गुनाह को ....
माँ , तूने बताया था कि तुझे मैं नहीं, बेटा चाहिए था..
पर जब भी मेरी जान पे बन आयी, कैसे हराया तूने उस ' ख़ुदा ' को ?
पर जब भी मेरी जान पे बन आयी, कैसे हराया तूने उस ' ख़ुदा ' को ?
माँ , सब कहते हैं तूने लाखों दर्द सहें हैँ..
पागल ये दुनिया कहाँ है समझनें के क़ाबिल मेरी ' माँ ' को। ।
पागल ये दुनिया कहाँ है समझनें के क़ाबिल मेरी ' माँ ' को। ।
~ अमृता तालुकदार ' सुबह ' ……

